करता हूँ उनको भी नया साल मुबारक, जो समझ ही नहीं पा रहे दिल की बात, 2023 हो या 24, जारी रहेगा मेरा प्रयास, जो जिंदगी को ढो रहे हैं बिना किसी बात, खूब जी जिंदगी, पर बन नहीं रही वो बात, जिद्दी हूँ मैं वो आदमी, पहुंचुगा जरूर उस पार, ले के रहूंगा, चाहा था जिसे, बिना किसी बात।। -मोहित
Posts
क्योंकि... बात है जरूरी
- Get link
- X
- Other Apps
दिमाग कह रहा है ना, पर बात है जरूरी, दिल कह रहा है हां, उसे बताना है जरूरी, ऐ दिल तू लगने से पहले सुन तो लेता हमारी, क्या पता हम दिमाग से लडक़र व्यथा सुनाते तुम्हारी, दिमाग और इस दिल की जंग में, दिल पड़ रहा है भारी, दवा नहीं मिली, तो कहीं हो ना जाए दिल की बीमारी, पता है मुझे, मान ली दिल की बात तो पड़ेगा बहुत भारी, मयखाने में भी दिल को बहलाना पड़ रहा है मुझ पर भारी, जिसको कहना था कह दिया, अब है उसकी बारी।। -मोहित
- Get link
- X
- Other Apps
जाना बेरूखी क्या चीज है.... जब दर्द हुआ तो जाना बेरूखी क्या चीज है, पीकर भी नहीं हुआ नशा तो जाना, किसी का हो जाना क्या चीज है, कुछ बातें कभी कही नहीं जाती, समझना ही काफी है कि क्या चीज है, अब कैसे कहूं, क्या करूं, बेचैनी बढ़ रही है पर वो अज़ीज है। -मोहित मैं भी तन्हा, वो भी तन्हा चारों ओर है भीड़, फिर क्यूं हैं तन्हा, बाते हैं बहुत, मगर दिल है तन्हा, सब कुछ है मेरे पास, कहने को यहां, पर ढूंढने जाउं खुशी, तो मन है तन्हा, आधी गुजर चुकी ये जिंदगी, पर दिल रहा तन्हा, चाहा जो क्या मिल पाएगा कभी, या यूं ही गुजर जाएगा जिदंगी का ये सफर मेरा तन्हा। -मोहित
खुद कहीं खो गया हूँ ‘मैं’
- Get link
- X
- Other Apps
जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते खुद कहीं खो गया हूँ ‘मैं’ बदलते मौसम की रिमझझिम बारिश में खुश होना अब भूल चुका हूँ ‘मैं’ अब तो मयखाने में भी खुशी को ढूंढना बंद कर चुका हूँ ‘मैं’ अपने शोक पूरे करने की कोशिश करना भी भूल गया हूँ ‘मैं’ दोस्तों की महफिल में गिले-शिकवे करना भी भूल चुका हूँ ‘मैं’ जमाने की रस्में पूरी करते-करते अब थक चुका हूँ ‘मैं’ गमे-जिंदगी में बाकी एक उम्मीद के उजियाले को क्या ढूंग पाउंगा ‘मैं’ दिल के तार किसी से जुड़ गए हैं, ये उसे क्या कभी बता पाउंगा ‘मैं’ छोडक़र दुनियादारी की चिंता क्या कभी मन की कर पाउंगा ‘मैं’ -मोहित
मतदान से ठीक पहले मंदिर निर्माण की घोषणा वोटों के ध्रुवीकरण का अंतिम प्रयास
- Get link
- X
- Other Apps
-मोहित भारद्वाज- सीएए और एनआरसी के विरोध में दिल्ली के शाहिन बाग में चल रहा धरना ऐतिहासिक रूप लेता जा रहा है और इस धरने में बड़ी संख्या में हिंदू धर्म के लोग भी धरनारत लोगों के समर्थन में उतर आए हैं कि उन्हें इस धर्म में धर्म के नाम पर बांटने वाला कानून नहीं चाहिए। जो कानून देश के संविधान की मूल भावना के विरूद्ध हो वह उन्हें स्वीकार नहीं है। इसके उलट भाजपा के तमाम नेता दिल्ली चुनावों में अपने भाषणों में सरेआम कह रहे हैं कि सीएए से उनकी सरकार पीछे नहीं हटेगी और विरोध करने वाले लोग देश के माहौल को बिगाडऩा चाहते हैं। दिल्ली चुनाव में मतदान से ठीक तीन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी स्वयं संसद में लंबा चौड़ा भाषण देकर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का ऐलान कर रहे हैं। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर के फैसले के 88 दिन बाद केन्द्र सरकार ने राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का फैसला लिया 6.7 एकड़ भूमि ट्रस्ट को सौंप दी। प्रधानमंत्री जी ने आज अपने संबोधन में 14 बार श्रीराम, 1 बहार हिंद तथा 4 चार बार भारत शब्द का इस्तेमाल किया। ऐसे में जब मीडिया से जुड़े अनेक साथी, आम ...
अपने ही देश में बेगाना करने की ये साजिशें
- Get link
- X
- Other Apps
-मोहित भारद्वाज- अपने ही देश में अपनी पहचान बताने के लिए मजबूर करने वाले कानून सीएए, एनआरसी के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग की हजारों औरतों को धरने पर बैठे एक माह का समय बीतने का हो है। प्रतिदिन अपना कामकाज निपटाकर सांय 4 बजे ये औरतें अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ धरने पर पहुंचती हैं और देर रात तक सर्दी में शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध जताने के लिए मजबूर हैं, ताकि धर्म के नाम पर देश को बांटने पर उतारू इस सरकार के हुक्मरान जाग सकें, मगर इन लोगों की बातें सुनना तो दूर भाजपा के मंत्री इनको धमकाने वाली बयानबाजी कर रहे हैं। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेगी का कहना कि अच्छा है अगर शाहीन बाग में बैठी औरतें स्वयं ही चली जाएं। यह किस तरह की भाषा है। इसी तरह गृहमंत्री भी कह रहे हैं कि विरोध चाहे कितना भी हो सीएए लागू करके ही रहेंगे। अंदाजा लगाया जा सकता कि अपने मंशूबों को लागू करने के लिए केन्द्र सरकार किसी विरोध का परवाह नहीं कर रही और चाहे इसके परिणाम कितने भी घातक क्यों न हों वे अपना फैसला थोपकर रहेंगे। पिछले पांच सालों में लिए गए उनके फैसलों पर अगर नजर दौड़ाई जाए तो यह साफ हो जाता है कि इस बार भ...