"चौकीदार" के भेष में गोडसे की कौम!
क्या प्रचंड बहुमत तानाशाही का लाईसेंस है! -मोहित भारद्वाज- आंखे बंद कर लीजिए, कान बंद कर लीजिए, कलम चलाना भी रोक दीजिए, कुछ भी बुरा क्यों न हो रहा हो आपके सामने रियक्ट मत कीजिए, क्योंकि आप एक ऐसे देश के निवासी हैं जिसके वर्तमान हुक्मरानों के खिलाफ बोलने वालों को न के वल देशद्रोही समझा जाता है, बल्कि विरोध करने पर उनको पीटा भी जाता है। देश की सबसे प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में गत रात्रि हुई बर्बरता असल में पिछले कुछ समय से देश के ताजा माहौल को बयां कर रही है। देश के राजधानी की यूनिवर्सिटी के कैंपस में सरेआम कुछ नकाबपोश हाथों में राड, तलवार, डंडे लिए हुए आते हैं और छात्रों को पीटना शुरू कर देते हैं। हैरानी की बात है कि पुलिस विश्वविद्यालय के बाहर खड़ी रही और दो घंटे बाद तब अंदर गई जब नकाबपोशों ने कैंपस में खुली तबाही मचा ली और अनेक छात्रों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। सोच कर ही मन सिहर उठता है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं। क्या हमारे अमर शहीदों ने इसी भारत के निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। कि...